जीना सिखाते हैं श्रीकृष्ण -डॉ. गौरव बिस्सा

समूचे भारत में यदि समाज में सबसे प्रतिष्ठित, लोकप्रिय, देवस्वरूप नायक हैं, तो वो हैं भगवान कृष्ण महान स्ट्रेटेजिस्ट, संसार के सबसे बड़े मैनेजमेंट गुरु, विश्व में धर्म की स्थापना करने वाले तथा भगवद गीता द्वारा समूचे विश्व को नेतृत्व, मानव मूल्य, प्रशासन, स्व प्रबंध का पाठ सिखाने वाले महान व्यक्तित्व हैं। श्रीकृष्ण वास्तविक लाइफ कोच हैं, जो जीना सिखाते हैं। भगवान कृष्ण का जन्म रात में हुआ। रात अंधकार या अज्ञानता का प्रतीक है, कृष्ण का जन्म रोशनी लाता है अर्थात अंधकार को दूर भगाता है, कृष्ण जन्म पर सभी जंजीरें टूट जाती हैं। इन जंजीरों का टूटना सांकेतिक है, इसका अर्थ है सभी अवगुणों और निम्न प्रवृत्तियों रूपी बेडिय़ों का टूटना, जब कृष्ण जन्म हुआ तो जेल के सभी पहरेदार सो गए। इसी कारण श्रीकृष्ण जेल से मुक्त हो पाए। यह दर्शाता है कि यदि हम सच्चे मन से ईश्वर साधना करें तो आस्था का उदय होता है और ईश्वर सभी बाधाओं को दूर कर हमारा मार्ग प्रशस्त कर देता है।
श्रीकृष्ण की बांसुरी और जीवन प्रबंध
कृष्ण की बांसुरी भी जीवन जीने की कला समझाती है। बांसुरी कच्ची बांस की होती है, इसका अर्थ है कि अच्छी बांसुरी तभी बन सकती है, जब हरे अर्थात कच्चे बांस को ही तोड़ा जाए। यह हमें जीवन में त्याग करने की प्रवृत्ति को समझाता है, इसका अर्थ है कि यौवन काल में ही यदि हम व्यर्थ की बातों से स्वयं को अलग कर लेवें और जवानी में ही अपने लक्ष्यों को समझ लेवें तो हम अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर लेंगे।
बांसुरी खोखली होती है, यह एक संकेत है कि जिस प्रकार बांसुरी में से व्यर्थ की लकड़ी निकाल दी जाती है उसी प्रकार हम भी अपने मस्तिष्क के घटिया और बेकार विचारों को निकाल फैंके। बांसुरी में कोई गांठ नहीं होती, इसका अर्थ है बांसुरी को तब तक घिसा जाता है जब तक कि सारी गांठें घिस कर सम न हो जाएं। यह हमें सिखाता है कि मन की गांठ बांधना, अहंकार रूपी गांठ बांधना, गलत है, जरा सोचिए यदि हमारे मन में किसी के लिए बुरा भाव या गांठ न हो, बुरे कुत्सित विचार न होंए और बुरी बातों को हमने त्याग दिया हो तो क्या जीवन श्रेष्ठ और संगीतमय नहीं हो जाएगा।
कालिया नाग की कथा सिखाती है जीवन जीने की कला
हम नित्य प्रति चित्रों में श्रीकृष्ण को कालिया नाग पर नृत्य करते हुए देखते हैं...क्या सिर्फ एक गेंद के लिए उन्होंने ऐसा किया था...कदापि नहीं। भगवान ने कालिया नाग को खूब मारा, पीटा और उसका सारा विष निकाल दिया, उसके प्राण नहीं लिए। ये तो एक सांकेतिक कथा है। इसका गहन अर्थ समझना चाहिए कालिया के पांच फन हैं और भगवान उन पर नृत्य कर रहे हैं...। कालिया नाग के ये पांच फन हमारी पांच इन्द्रियों को दिखाते हैं, भगवान की ओर से उन्हें मारने का अर्थ है कि इन्द्रियों को नियंत्रण में रखो, प्राण नहीं लेने का अर्थ है कि इन्द्रियों का सुख भोगो लेकिन उन्हें विषाक्त न करो। यानि उसमे इतने न डूब जाओ कि समस्याएं हो जाएं, भगवान का नृत्य इस बात का संकेत है कि सभी इन्द्रियां ईश्वरीय शक्ति के वश में होनी चाहिए। यही तो जीवन है।
'आपदा प्रबंध व लक्ष्य निर्धारण
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कुताम्Ó
धर्म संस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे..
श्रीमद्भगवतगीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि जब-जब विश्व में धर्म की हानि होगी, तब-तब अधर्म का नाश करने तथा धर्म की स्थापना के लिए मैं पृथ्वी पर अवतार लूंगा। स्पष्ट है कि श्रीकृष्ण का जन्म विश्व में फैली दुव्यवस्था को ठीक करने के लिए ही हुआ था। यही तो आपदा प्रबंध अर्थात क्राइसिस मैनेजमेंट है। कृष्ण कहते हैं कि सकारात्मक सोच वाले लोगों का कल्याण और उन्हें सफल बनाना ही उनका कार्य है। नकारात्मक लोगों का विनाश अर्थात निकृष्ट सोच वाले लोगों को दंड देना भी श्रीकृष्ण आवश्यक मानते हैं। लक्ष्य निर्धारण हो या स्वधर्म पालनए कत्र्तव्य पथ को कीर्ति पथ मानने वाले भगवान श्रीकृष्ण वास्तविक सेल्फ मैनेजमेंट गुरु हैं। श्रीकृष्ण सामाजिक समरसता, उत्तम प्रशासन, युद्ध में पराक्रम, स्त्री-रक्षा, इमोशनल इंटेलिजेंस और स्थिर चित्त मस्तिष्क से कार्य करने को श्रेयस्कर मानने वाले महान साधक हैं ।



source https://www.patrika.com/jaisalmer-news/shri-krishna-teaches-to-live-dr-gaurav-bissa-7038969/

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