करोड़ों रुपए स्वीकृत होने के बावजूद नहीं किया भुगतान
जैसलमेर। सीमांत जैसलमेर जिले में सरकारी तंत्र की अनदेखी और असंवेदनशीलता का मामला सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक और उनके कार्यालय की अनदेखी के चलते एक तरफ शिक्षकों को दूधवालों से लेकर दुकानदारों के तकाजे झेलने पड़ रहे हैं तो दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में खाना बनाने वाली अल्प वेतनभोगी कुक कम हेल्पर की दिवाली काली होने की कगार पर आ गई है। यह सारा मामला समय पर भुगतान नहीं किए जाने का है और शोचनीय तथ्य यह है कि राज्य सरकार की ओर से विभाग के खाते में २४ करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि बिना उपयोग के पड़ी है। जबकि साढ़े चार करोड़ रुपए ही चुकाने थे। यह भुगतान कायदे से विद्यालय खुलते ही किया जाना था क्योंकि इस बार सरकार ने मिड डे मील के तहत सूखी खाद्य सामग्री वितरित करने का कदम उठाया है। जो सीधे जयपुर से नामांकन के अनुसार पैकिंग की हुई मिल रही है। पिछले दिनों अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के बाद मंत्रालयिक संवर्ग के अधिकारी को चार्ज दिया गया जिन्हें वित्तीय अधिकार नहीं दिए जा सकते थे। अब अतिरिक्त शिक्षा अधिकारी को चार्ज दिया गया है लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी उन्हें वित्तीय अधिकार दिए जाने का मसला बीकानेर और जयपुर के बीच अटका हुआ है। अब शनिवार-रविवार के साप्ताहिक अवकाश हैं। आगे सोमवार को कार्यालय खुलेंगे तथा फिर धनतेरस का सार्वजनिक अवकाश आ जाएगा।
यह है मामला
जानकारी के अनुसार जिले में जैसलमेर, सम और सांकड़ा पंचायत समिति में मार्च 2020 तक कुल 4 करोड़ 3 लाख 38 हजार पांच सौ बतीस रुपए की मांग थी और राज्य सरकार ने जैसलमेर जिले में कुछ महीने पहले 24 करोड़ ३५ लाख 91 हजार रुपए एक साथ जारी कर दिए। जिसके बाद 31 मार्च 2020 तक की राशि खर्च करने के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक कार्यालय के पास एमडीएम के रूप में 20 करोड़ 32 लाख 53 हजार रुपए की राशि शेष रहेगी, जिससे सरकार के आदेशानुसार हाल में कुक कम हेल्पर का मानदेय देने और आगामी वर्ष मार्च 2021 तक खपत कर सके। शेष राशि इतनी है कि यह न केवल मार्च 2021 तक ही नहीं चालू अक्टूबर माह तक भी पर्याप्त होगी।
उदासीनता का मंजर
जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक की उदासीनता के कारण बकाया राशि के लिए दूधवालों से लेकर विभिन्न दुकानदारों के तकाजे संस्था प्रधानों व संबंधित शिक्षकों को झेलने पड़े हैं। इससे बचने के लिए कई शिक्षकों ने तो अपनी जेब से दुकानदारों का भुगतान तक कर दिया। बताया जाता है कि कोरोना से काल कवलित हुए एक संस्था प्रधान के तो ढाई लाख रुपए अब तक बकाया ही हैं। कुक कम हेल्पर का काम करने वाली महिलाओं तक का भुगतान बाकी ही पड़ा है। स्कूलों और मदरसों में काम करने वाली इन महिलाओं की संख्या १२०० से १५०० तक बताई जाती है। जानकारी के अनुसार गत माह जिला शिक्षा अधिकारी पद से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी ने समय रहते राशि जारी नहीं की और सेवानिवृत्ति की तारीख नजदीक आने पर फाइल जिला कलक्टर के पास भिजवाई। शिक्षक एवं पंचायती राज कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष जगमाल सिंह भाटी ने आरोप लगाया कि इनका भुगतान ऑनलाइन होना है, अधिकारियों ने रुचि नहीं दिखाई।
मिड डे मील में बकाया का गणित
दाल, मसाला, नमक, तेल आदि (कुकिंग कन्वर्जन) की ४५ लाख १० हजार ३८०, कुक कम हेल्पर जिनके संबंध में सरकार ने आदेश जारी किया है कि कोराना काल में जब मिड डे मील नहीं पका तब के मानदेय का भुगतान भी उन्हें कर दिया जाए, उनके ३ करोड़ ११ लाख ८९ हजार ७१०, एमएमई यानी प्रबंधन व्यय के ५ लाख और अन्नपूर्णा दूध योजना के ४१ लाख ३८ हजार ४४० रुपए बकाया हैं। दूध योजना गत सरकार ने शुरू की थी। इसमें कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों को 150 मिली और छह से आठवीं तक के विद्यार्थियों को 200 मिली दूध पिलाया गया। सरकार ने कोरोना काल में पढ़ाई बाधित होने पर दिसंबर 2020 में इसे बंद कर दिया। यह भुगतान आज तक बकाया है।
सरकार तक पहुंचाएंगे मसला
मिड डे मील संबंधित राशि का भुगतान शीघ्र किया जाना चाहिए। यह मसला हम राज्य सरकार के संज्ञान में लाएंगे। सरकार ने दिल खोलकर राशि दी और जैसलमेर में उधारी से उलझ रहे शिक्षकों और अल्प मानदेय भोगी कुक कम हेल्पर को अपनी रोटी के लाले पड़ रहे हैं।
- प्रकाश विश्नोई, प्रदेश मंत्री, राज. शिक्षक एवं पंचायतीराज कर्मचारी संघ
अधिकार मिलते ही भुगतान
जिला शिक्षा अधिकारी पद का कार्यभार हाल में दिया गया है। अभी तक वित्तीय अधिकार सरकार से नहीं मिले हैं। यह अधिकार मिलते ही प्राथमिकता से एमडीएम संबंधी भुगतान करने की कार्यवाही की जाएगी।
- जितेन्द्रसिंह, कार्यवाहक जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक, जैसलमेर
source https://www.patrika.com/jaisalmer-news/crores-of-rupees-not-paid-despite-being-approved-7149245/
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