रेत के समंदर में ऊंटों से पहुंच कर हो रहा वैक्सीनेशन और मवेशियों का ईलाज
जैसलमेर. जिले में संचालित किए जा रहे प्रशासन गांवों के संग अभियान- 2021 के तहत पशुपालन विभाग की ओर से जिले के दूरदराज व रेगिस्तानी क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालकों को विभाग से सम्बन्धित योजनाओं का लाभ देने व आय दुगुनी करने के लिए शिविरों के दौरान अधिकाधिक जानकारी दी जा रही है। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. वासुदेव गर्ग व उपनिदेशक डॉ. उमेश वरंगटीवार के निर्देशन में जिले में अधिकारी-कर्मचारी को सौंपे गए शिविर दायित्वों का पूर्ण जिम्मेदारी के साथ सम्पादन करने के लिए समर्पित भाव से जुटे हुए हैं। संयुक्त निदेशक डॉ. वासुदेव गर्ग ने बताया कि पशुपालकों के पशुओं को शिविर में कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण, उपचार आदि से लाभान्वित कर पशुपालकों को राहत पहुंचाई जा रही है। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत ग्राम्यांचलों में आयोजित हो रहे शिविरों में पशुपालकों की ओर से पशुपालन विभाग द्वारा स्थापित काउंटर पर दवाइयां व पशुओं में से संबंधित बीमारियों की आवश्यक रोकथाम के उद्देश्य से विचार-विमर्श के लिए अच्छी खासी भीड़ उमड़ती रही है।
संयुक्त निदेशक ने बताया कि मरुस्थलीय जैसलमेर जिले में पशुपालकों की आजीविका का प्रमुख साधन पशुधन एवं पशुपालन होने के कारण शिविरों के प्रति पशुपालकों का खास रुझान हर क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। ये पशुपालक विशेष रुचि लेकर दवाइयां प्राप्त कर रहे हैं। इस सम्बन्ध में विभाग के अधिकारी-कार्मिकों की ओर से शिविर में गोष्ठी का आयोजन कर विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी जा रही है एवं विषम परिस्थितियों में पशुपालकों के घर जाकर टीकाकरणए डॉजिग, डस्टिंग व उपचार का कार्य किया जा रहा है। विभिन्न दुर्गम एवं रेतीले इलाकों में ऊँटों के सहारे पहुंच कर वैक्सीनेशन और ईलाज का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान विभाग की ओर से अब तक 62 शिविरों में अब तक 17 हजार 106 पशुओं का आवश्यक उपचार, 38 हजार 660 पशुओं का टीकाकरणए 1 लाख 28 हजार 365 डॉजिंगए 1 लाख 45 हजार डस्टिंग तथा कृत्रिम गर्भाधान का कार्य व गोष्ठी में 4 हजार 614 पशुपालकों को लाभान्वित किया गया।
की जा रही समझाइश
शिविरों में वर्तमान मौसम में उतार.चढ़ाव के मद्देनजऱ भी पशुपालकों को आवश्यक समझाईश की जा रही है। पशुपालकों को बताया जा रहा है कि जिले में सर्दी व उत्तरी.पूर्वी सर्द हवाएं चलने के कारण वातावरण में रात्रि का तापमान काफी न्यूनतम चला जाता हैं। इसके परिणाम स्वरूप पशुओं में निमोनिया, दस्त रोग आदि होने की पूरी सम्भावना बनी रहती है। इस स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए जिले के समस्त पशुपालकों से कहा जा रहा है कि वे अपने.अपने पशुओं को छत लगे व ढके बाड़ों में रखें और इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखने की जरूरत है।
source https://www.patrika.com/jaisalmer-news/vaccination-and-treatment-of-cattle-by-reaching-camels-in-the-sea-of-s-7147821/
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