पर्यटन उद्योग की झोली में हर वर्ष जा रहे 1200 करोड़
जैसलमेर. रेत के समंदर के बीच बसे सरहदी जिले में समस्याएं है तो संभावनाएं भी अपार है। यहां विकास की गति विगत वर्षो में बढ़ी है। कोरोना के काल खंड में कुछ देर विकास रुका, लेकिन एक बार फिर विकास पथ पर जैसाण लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वर्ष १९७० के दशक में पाक सीमा से सटे खूबसूरत जैसलमेर जिले में पर्यटन व्यवसाय ने पांव पसारना शुरू किया और अगले दो दशकों में यह और मजबूती से आगे बढ़ा। कोरोना काल को छोड़कर यदि गत डेढ़ दशक में पर्यटन के बूते जैसलमेर विश्वस्तरीय पहचान बना चुका है। यहां पर्यटन से जुड़े व्यवसायों ने जिसने भी निवेश किया, उसे कई गुना लाभ भी मिला है। मौजूदा समय में जैसलमेर में पर्यटन का टर्न ओवर 1२०० करोड़ तक पहुंच गया है। ऐसे में निवेशकों को तो लाभ मिल ही रहा है, शहर से गांव तक में हजारों हाथों को रोजगार भी मिला है। पर्यटन से जुड़े जानकार मेघराजसिंह परिहार बताते हैं कि जैसलमेर में नए पर्यटन क्षेत्रों के विकास व पर्यटकों के यहां अधिक से अधिक ठहराव को देखते हुए संगठनात्मक किस्म के धन निवेश की जरूरत है।
दुनिया देख चुकी ताकत, अभी और बढ़ेगी
आंधियों के थपेड़ों व भीषण गर्मी के लिए कभी अभिशापित सरहदी जिला अब 'पवन' व 'सौरÓ से बनी ऊर्जा दुनिया को लुटाने को बेताब है। गत डेढ़ दशक में पवन ऊर्जा के क्षेत्र में विभिन्न सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कम्पनियों ने कोई २००० करोड़ रुपए का निवेश किया हुआ है। यह निरंतर बढ़ ही रहा है। हकीकत यह भी है कि जैसलमेर में देश के किसी भी अन्य जिले या क्षेत्र से ज्यादा जमीन उपलब्ध है। ऐसे में जैसाण में आगामी समय में भी पवन ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में निरंतर विकास की संभावनाएं बनी रहेगी। जिले में वर्तमान में करीब 3000 पवन उऊर्जा संयंत्र अभी क्रियाशील हैं। इन चक्कियों से २8०० मेगावाट से भी अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। उधर, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वर्तमान में पोकरण उपखंड क्षेत्र के धूड़सर में रिलायंस पावर ने बड़ा प्लांट स्थापित कर रखा है। पोकरण क्षेत्र के थाट में करीब ५० मेगावाट, बड़ली में ५ और लाठी में एक मेगावाट के संयंत्र बनाए गए हैं। नोख व फतेहगढ़ क्षेत्र में उऊर्जा के क्षेत्र में अग्रसर होने को तैयार ही है।
औद्योगिक विकास की दरकार
औद्योगिक विकास के क्षेत्र में अच्छी खबर यह है कि जैसलमेर में सीमेंट उद्योग को लेकर संभावनाएं प्रबल हुई है। अब जरूरत है, बस निवेशकों को आगे आने की। हाल ही में जैसलमेर के भूगर्भ में मौजूद लाइम स्टोन, जिप्सम जैसे खनिज बड़े परिमाण में हैं और यह जिला विगत कई वर्षों से सीमेंट उद्योग की बाट जोह रहा है। यह लाइम स्टोन देश के प्रमुख स्टील निर्माण संयंत्रों और सीमेंट उद्योगों में काम आता है। जिले के सोनू गांव से निकलने वाली लाइम स्टोन की खदान की ढुलाई कर जैसलमेर का रेलवे स्टेशन पूरे जोधपुर मंडल में सबसे कमाऊ बना हुआ है। रेलवे को इस पत्थर की ढुलाई से सालाना सैंकड़ों करोड़ की आमदनी होती है।
संभावनाओं को लेकर सरकार गंभीर
पर्यटन जैसलमेर जिले की पहचान है देश-दुनिया में। जैसलमेर की भूमि के बड़े हिस्से को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की मुख्यमंत्री ने पहल भी की। विकास के लिहाज से जैसलमेर में अपार संभावनाएं है। राज्य सरकार भी इसको लेकर गंभीर है। आने वाले दिनों में प्रयासों को अमलीजामा पहनाया जाएगा।
-शाले मोहम्मद, कैबिनेट मंत्री, राजस्थान सरकार
source https://www.patrika.com/jaisalmer-news/1200-crores-going-to-the-tourism-industry-every-year-7193197/
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