'अधिक से अधिक स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने की जरूरत'


जैसलमेर. स्वदेशी चिन्तक, वक्ता एवं भारत स्वाभिमान के राष्ट्रीय प्रवक्ता रह चुके राजीव दीक्षित की जयंती एवं पुण्यतिथि पर 30 नवम्बर को स्थानीय संत उद्धवदास कन्हैया गोशाला में श्रद्धांजलि सभा एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसके साथ ही उनकी स्मृति में गौषाला में लापसी बनाकर गायों को खिलाई गई। इस अवसर पर गौशाला में गोपुष्ठी यज्ञ किया गया तथा उपस्थित जनों द्वारा आहुतियां दी गई। संगोष्ठी में वक्ता हनुमानराम ने कहा कि राजीव दीक्षित द्वारा स्वदेशी के आग्रह को हम सभी को समझना होगा एवं अधिक से अधिक स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करना एवं अपने नजदीकी बाजार से ही वस्तुओं को खरीदना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। डॉ. उमेश वरगंटीवार ने कहा कि राजीव भाई द्वारा गौरक्षा एवं गो संरक्षण तथा संवद्र्धन को इतने अच्छे तरह से समझाया गया था, उसी के फलस्वरूप उनके विचारों को सुनकर ही आज गायों के प्रति राष्ट्रीय चिन्तन अधिक बढ़ा हैं। पं. राजेन्द्र अवस्थी ने संगोष्ठी में अपने विचारों में कहा कि राजीव भाई द्वारा भारतीय इतिहास में छिपी हुई हमारी संस्कृति और शिक्षण पद्धतियों का अध्ययन किया और बताया कि हमारी शिक्षा कितनी उन्नत और विकसित थी, लेकिन वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पौराणिक गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था से काफी पीछे हैं। कलाकार थिरपाल गर्ग ने जैविक खेती एवं पशुपालन विषय को समझाया कि निरोगी रहने के लिए हमारे लिए जैविक खेती आवश्यक हैं और जिस प्रकार आज की रसायन युक्त खेती हो रही हैं, निरन्तर बीमारियां बढ़ रही हैं। इसको लेकर हमें जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। गोशाला व्यवस्थापक राणुसिंह राजपुरोहित ने समझाया कि राजीव भाई ने स्वदेशी चिकित्सा के व्याख्यान हमारे घर की रसोई में अपनाए जाने वाले सभी वस्तुओं के उपयोग को बताया एवं उनके गुणों को समझाया हैं तथा उसके केवल सही उपयोग से ही हम काफी हद तक बीमारियों से बच सकते हैं। सेवा भारती के जिला अध्यक्ष चन्द्रभान खत्री ने बताया कि हमारे देष की आजादी भी स्वदेशी आन्दोलन से ही मिली थी और हमें स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए अब भी हमें स्वदेशी के आग्रह को ही अपनाना होगा। गोशाला संयोजक कपिल खत्री ने सभी से बताया कि राजीव भाई ने स्वदेशी चिकित्सा, स्वदेशी-विदेशी वस्तुओं, जैविक खेती, गो रक्षा, भारतीय संस्कृति-इतिहास, अर्थशास्त्र एवं सभी ज्वलंत विषयों को बारीकी से अध्ययन किया। कार्यक्रम में पुरुषोत्तमदास खत्री, शिवनाथसिंह, हरनारायण खत्री, संतोष कुमार, लूणसिंह, इन्द्रसिंह, चन्दनसिंह, जग्गाराम, अंतरिक्ष, सत्यनारायण रामावत आदि सभी ने राजीव भाई को पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी।



source https://www.patrika.com/jaisalmer-news/need-to-use-more-and-more-indigenous-goods-7202987/

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