सरहद पर 'उड़ते धोरों ' पर निगरानी रखेगा 'बांस'
जैसलमेर. सूखा प्रभावित जैसलमेर के रेगिस्तानी भूभाग में बांस का पौधरोपण कर इस क्षेत्र को हरित बनाने के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में धोरों के खिसकने की समस्या से निपटने के लिए सीमा सुरक्षा बल और भारत सरकार के खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग की तरफ से साझा प्रयास किया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह प्रयोग तनोट सीमा क्षेत्र में किया जाएगा। जहां इसे सफलता मिलने पर पूरे रेगिस्तानी भू-भाग में इस कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाया जा सकेगा। इस रेगिस्तान को नखलिस्तान में तब्दील करने की योजना को बोल्ड यानी सूखी जमीन पर बांस नखलिस्तान नाम दिया गया है। मंगलवार को सीमा सुरक्षा बल के विशेष महानिदेशक पश्चिम सुरेंद्र पंवार तथा खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना इसकी शुरुआत तनोट क्षेत्र से करने वाले हैं। तो बदल जाएगी तस्वीर सीसुब सूत्रों के अनुसार खादी और ग्रामोद्योग आयोगए भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के तहत पायलट प्रोजेक्ट बोल्ड यानी सूखे में भूमि पर 'बांस' से रेगिस्तानी क्षेत्र में व्यापक आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक विकास संभव हो सकेगा। बहुत कम पानी से बढऩे वाले ब...